Sant Santaji Maharaj Jagnade
मोढ़, मोदी, साहू, तेली, गनिगा, गान्दला इत्यादी तेली समाज की उप जातीयोकी तरह ही घांची गुजरात, राजस्थान और भारत के विभिन्न भागों में पाए जाने वाली एक तेली जाति है। मोढ़ घांची एक अन्य उप-जाति है घांची की तरह से साहू तेली, तिळवण तेली, तेली, घाणेरा घॉची, कचौलिया तेली, गौपालक घॉची, वीरशैव लिंगायत तेली, गनिगा इत्यादी बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, झारखंड, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पाया जाने वाला अन्य पिछड़ा वर्ग ( ओबीसी ) हैं
घांची जाति का उदभव क्षत्रिय जाति से हुआ है इसलिये घांची समाज को क्षत्रिय घांची समाज तेली ( Ghanchi Kshatriya teli ) के नाम से भी जाना जाता है । घांची तेली नाम भारतीय मूल का हैं, घांची लोग जो की गुजरात में तेल और घी आदि का व्यापार करते हैं. घांची लोग सामान्यतः अहमदाबाद, नवसारी, सूरत, वलसाड, बिलिमोरा में, मोढ़ घांची मूलतः मोढेरा गुजरात से निकले हुए हैं. सौराष्ट्र, अमरेली, बगासरा, बिलखा , भावनगर, जूनागढ़, कलोल, मुंबई, दिल्ली, कादी, राजस्थान में, पाली, सॉजत, सुमेरपुर, जोधपुर के कुछ हिस्सों में मोढ़ घांची पाये जाते है ।
बुलढाणा - स्थानिक संताजी कॉन्व्हेंट मेहकर येथे शैक्षणिक सत्र २०१६-१७ मध्ये झालेल्या शिष्यवृत्ती परीक्षेमध्ये वर्ग ५ व वर्ग ८ मधील विद्यार्थ्यांनी सर्वोत्तम सुयश प्राप्त केले आहे . वर्ग ५ मधून १) प्रणव तेजनकर २) कु.प्राची आघाव ३) कु. प्रियंका अंभोरे ४) आनंद गवई ०५) अनुज मोरे ६) देवाशीष देठे व वर्ग ८ मधून १) कु.वेदिका डोंबळे २) शोनक व्यवहारे ३) सौरव तोंडे ४) कु.नम्रता जुनघरे
मीनापुर (मुजफ्फरपुर), संस :- बिहार तैलिक तेली साहु समाज के प्रदेश प्रवक्ता सह तैयारी समिती के तिरहुत प्रमंडल प्रभारी मीनापुर बाजार में तैलिक तेली साहु समाज की बैठक की । कहा कि इस बार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में बडी संख्या मे तेली समाज के जन प्रतिनिधि चुनाव जीतकर आए हैं जिसकी संख्या सूबे में चार हजार से अधिक है । विधानसभा मे भी पांच विधायक हैं ।
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जाति व्यवस्था का इतिहास पुराना नही है किन्तु वर्ण व्यवस्था प्राचीनतम है संभव है । प्रारंभिक अवस्था में कृषी कर्म ही सभी के लिए सहज रहा। कृषि अवंलबित कार्य में कुशलता भी इसकी पृष्ठभूमि बनी । यहां सत्ययुगीन किवदन्ति को स्वीकार करे तो कोल्हू निर्माण की परिकल्पना प्राचीन रही, जिसमें पेरने के लिए तेल उत्पत्ति के लिए तिल आदि बीज मिले जिससे सहज तेली का आधार कारण हुआ जो तेल एवं खली को उत्पन्न करे वही तेली.
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डॉ. आर. के. शनमुखम चेट्टी का जन्म सन 1890 में कोयंबटूर में हुआ था । कानून की परीक्षा उत्तीर्ण करने उपरांत सार्वजनिक जीवन में आये और सन 1920 में विधान परिषद के सदस्य चुने गये सन 1930 मे विधान परिषद के उपाध्यक्ष रहे । स्वतंत्रता के बाद पं. जवाहरलाल नेहरू मंत्री मंडल में वित्तमंत्री बनाये गये । 1953 में इनका अल्पायु में देहावसन हुआ ।