Sant Santaji Maharaj Jagnade
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चोलवंशी शासन काल में तमिलनाडू राज्य में नवयुवक कोवालन ने अप्सरा के समान सुन्दरी कण्णगी से शादी की थी । यह सुखी एवं वैभवपुर्ण व्यापारिक तेली परिवार था । इसी मध्य कोवालन राजनर्तकी माधवी पर मोहित हो गया और अपना सभी धन संपत्ती न्यौछावर किया । मोहपास भंग होने पर पुन: कण्णगी के पास आया । पारिवारिक व्यवस्था के लिए रत्नजडित पायल बेचते समय चोरी का मिथ्या लाछन लगाकर राजज्ञा से धड अलग कया गया ।
राजस्थान अंचल के हमीरपुर जिलान्तर्गत प्रमुख नग महोबा में धनीराम नामक व्यक्ति तेली समाज के ही थे । कवि जगनिक कृत आल्हखणड (आल्हा) में इसका उल्लेख है । वह आत्याधिक शक्तिशाली था, ही शस्त्र विद्या में निपुण था । बचपन से ही कुश्ची में अजेय योगद्धा रहा, परिणाम स्वरूप राजा ने पने प्रिय पुत्र का प्रमुख अंगरक्षक बना दिया । अंगरक्षक के रूप में धनीराम ने अपने प्राण की परवाह किए बिना स्वामी की रक्षा की । जान बचाई ।
9 वी सदी मे दक्षिण कोशल में तैलप एवं चालुक्य एवं कल्चुरी वंश ऐसा माना जाता है कि परमार वंशीय राजा मुंज के साथ तैलपो का अनेक बार युद्ध हुआ । जिसमें 6 वी बार राजा मंजु तैतलों से पराजित हुआ । तैलयो की संभवतया कलचुरियों का साथ दिया था । जिनका उल्लेख किया जाता है । कि वे कोकल्य द्वितीय के पुत्र गांगेयदेव तेलांगान हुए जिसे ही आक्रोश अथवा विरोधवशं गंगूतेली कहा गया है ।
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नीमच, मध्यप्रदेश :- दिनों सकल तेली समाज जिला नीम द्वारा माँ कर्मा बाई जयंती महोत्सव मनाया गया । बारादरी पर सभी एकत्रित हुए । दोघोडे कलश व आरती की बोली लगाई गई । भव्य ऐतिहासिक जुलूस की शुरूआत बारादरी से बैंड बाजे, ढोल, नाच गाने के साथ हुई । बारादरी से नया बाजार, घंटाघर, पुस्तक बाजार, विजय टॉकिज होते हुए अंत में टाउनहाल पर माँ कर्माबाई की विशाल आरती के साथ जुलूस का समापन हुआ ।
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साव तेली समाज मे आने वाले कुछ कुलनाम, कुळनाम, सरनेम ( आडनाव ) की जानकारी.
सावतेली समाजामध्ये आढळनारी काही आडनावे, सरनेम, कुळनाम ची माहिती.
१) सातपुते २) किरमे ३) घोगडे ४) बारसागढे ५) भुरसे ६) बोदलकर ७) चापळे ८) भांडेकर ९) कुकडकर १०) कुनघाडकर ११) सोनटके १२) देवरमले १३) दुधबडे १४) दुधबावरे १५) सोमनकर १६) लटारे १७) जुआरे १८) चलाख १९) बुरांडे २०) वासेकर २१) टिकले २२) वैरागडे २३) चिलांगे २४) खोबे २५) कोहळे