Sant Santaji Maharaj Jagnade
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संत संताजी जगनाडे महाराज का जन्म सन 1625 में महाराष्ट्र के पुना (चाकण) में हुआ था । उनके नाना का नाम भिवा जगनाडे पिता का नाम विठोबा जगनाडे और माता का नाम मथुबाई था । और उनका परिवार महान विठ्ठल भक्त था । उनके पिताजीने उन्हे घर मै ही पढाई लिखाई की शिक्षा दि । 12 वर्ष की आयु में उनका विवाह हो गया था । वे पैत्रिक तेल का व्यवसाय करने लगे, किन्तु एक दिन उन्होने संत तुकाराम का किर्तन सुना और उनके शिष्य हो गये ।
महाभारत के शांतिपर्व के वर्णन अनुसार, ऋषि जाजलि ने कठोर तप कर सिद्धि प्राप्त की, जिस पर उसे गर्व था । ऋषि के अहंकार से नाराज होकर उसके गुरू ने कह दिया कि वाराणसी का तेली समाज वैश्य तुलाधर संसार भर में धर्मात्मा, तपस्वी एवं तत्वदर्शी है । प्रतिस्पर्धी स्वभाव वस ऋषि जाजलि ने धर्मात्मा तुलाधर से भेंट कर पुछा कि अनेक प्रकार के तेलों एवंद्रव्यों का व्यापर करते हुए भी तुम्हें दार्शनिक अंतर्दृष्टि कैसे प्राप्त हुई । Dharmatma Teli Tuladhar
1) झरिया शाखा , 2) हरदिहा शाखा, 3) राठौर शाखा, 4) रंगहा, 5) तेली वैश्य शाखा, 6) तरहाने तेली शाखा इत्यादी प्रमुख शाखा है ।
1) झरिया शाखा :- इस शाखा को झेरिया या झिरिया भी कहते है । सर्वाधिक जनसंख्या इसी शाखा के लोग मूलत: किसान है ।
2) हरदिहा शाखा :- इस शाखा के लोग रायपुर नगर के आस -पास, धमतरी एवं दुर्ग जिला के धमधा क्षेत्र में निवासरत है । अंग्रेजो ने अपने प्रविेदनों में इन्हें हलिया उल्लेखित करते हुये श्रेष्ठ कृषक भी कहा है । पूर्व विधायक श्री नंद कुमार साहू इसी शाखा से हैं ।
समाजासाठी लढणारी व समाजा सोबतच इतरही समाजासाठी सामाजिक उपक्रम राबवनारे अमरावती जिल्हा तैलिक ( तेली समाज ) समिती तर्फे दरवर्षी ऊन्हाळी विज्ञान छंद शिबीराचे आयोजन करत असते.
संताजी भवन, भुमीपुञ काँलनी परीसरात यावर्षी सुद्धा २ ते ९ मे या महिन्यात ऊन्हाळी नाविण्यपूर्ण विज्ञान छंद शिबीर ( Aero Dynamic Workshop) यशस्वी रीतीने पार पडले. Amravati teli samaj Vigyan Shibir 2017
यवतमाळ :- विदर्भ तेली समाज महासंघाच्यावतीने आमदार मदन येरावार यांचा संताजी महाराजांची प्रतिमा, शाल व श्रीफळ देवून संतोष ढवळे यांच्या हस्ते सत्कार करण्यात आला. स्थानिक भाऊसाहेब नंदुरकर अभियांत्रिकी हिाविद्यालयात झालेल्या या कार्यक्रमाच्या अध्यक्षस्थानी उल्हास नंदूरकर होते.