भाजपा - जदयू में तेली समाज की अनदेखी पर बढ़ा असंतोष, संगठनों ने दी राजनीतिक परिणाम भुगतने की चेतावनी
पूर्णिया : भाजपा और जदयू के हालिया संगठनात्मक विस्तार तथा विधान परिषद से जुड़े राजनीतिक निर्णयों में तेली (तैलिक साहू) समाज की लगातार हो रही उपेक्षा को लेकर समाज के लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इस मुद्दे पर जिला तैलिक साहू समाज और भामा शाह विचार मंच ने संयुक्त रूप से अपनी चिंता व्यक्त करते हुए राजनीतिक दलों को दूरगामी परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
भामा शाह विचार मंच के संयोजक दिलीप कुमार ने कहा कि तेली समाज राज्य की सामाजिक और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है, लेकिन राजनीतिक स्तर पर उसे अपेक्षित सम्मान और भागीदारी नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की उपेक्षा लंबे समय तक नहीं की जा सकती और राजनीतिक दलों को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
जिला तैलिक साहू समाज के अध्यक्ष सोपाल साह ने आरोप लगाया कि संगठन विस्तार के दौरान समाज की अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि समाज के योग्य और सक्रिय कार्यकर्ताओं को उचित अवसर नहीं दिए जा रहे हैं। वहीं महासचिव दशरथ साह ने कहा कि वर्षों से तेली समाज भाजपा और जदयू के साथ मजबूती से खड़ा रहा है, लेकिन बदले में समाज को सम्मानजनक प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है।
समाज के उपाध्यक्ष प्रदीप साह ने कहा कि चुनाव के समय राजनीतिक दल तेली समाज के बीच जाकर समर्थन मांगते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद समाज की अपेक्षाओं और अधिकारों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अब समाज के लोग अपने राजनीतिक अधिकारों और हिस्सेदारी को लेकर अधिक जागरूक हो चुके हैं और लगातार हो रही उपेक्षा को स्वीकार नहीं करेंगे।
संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि तेली समाज राज्य और देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण सामाजिक शक्ति के रूप में अपनी पहचान रखता है। समाज की जनसंख्या, सामाजिक योगदान और राजनीतिक भागीदारी को ध्यान में रखते हुए संगठन में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। साथ ही विधान परिषद सहित विभिन्न संवैधानिक और राजनीतिक पदों पर भी समाज की हिस्सेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
दोनों संगठनों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि भविष्य में भी समाज की अनदेखी जारी रही, तो तेली समाज अपनी राजनीतिक रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य होगा। इसके साथ ही समाज के बीच व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा, ताकि लोगों को उनके राजनीतिक अधिकारों और भागीदारी के प्रति जागरूक किया जा सके।
अंत में भाजपा और जदयू के शीर्ष नेतृत्व से आग्रह किया गया कि वे तेली समाज की भावनाओं का सम्मान करें, समाज के योगदान को स्वीकार करें तथा उसे संगठन और राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक न्याय और समान भागीदारी की भावना को मजबूत करें।
