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दतिया उपचुनाव के बाद तेली - साहू - राठौर समाज में बढ़ी नाराजगी, भाजपा से सम्मानजनक राजनीतिक भागीदारी की मांग

13 August 2026 Rajasthan Teli Sahu Samaj 53 views

     भोपाल, 05 अगस्त 2026 - मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के बाद तेली, साहू और राठौर समाज के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर असंतोष की भावना खुलकर सामने आने लगी है। समाज के विभिन्न पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और प्रबुद्धजनों का कहना है कि वर्षों से भारतीय जनता पार्टी का समर्थन करने के बावजूद उन्हें संगठन और शासन व्यवस्था में वह सम्मान और भागीदारी नहीं मिल रही है, जिसके वे हकदार हैं।

     समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि दतिया विधानसभा उपचुनाव से पूर्व समाज की ओर से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को तेली समाज के एक योग्य उम्मीदवार का नाम भी प्रस्तावित किया गया था। उनका दावा है कि दतिया क्षेत्र में तेली-साहू समाज की संख्या और राजनीतिक प्रभाव दोनों ही महत्वपूर्ण हैं तथा चुनावी परिस्थितियों में समाज की एकजुटता ने निर्णायक भूमिका निभाई। इसके बावजूद समाज की भावनाओं और सुझावों को अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया, जिससे समाज के लोगों में निराशा और असंतोष का माहौल बना।

Datia Bypoll Ke Baad Teli Sahu Rathore Samaj Mein Narazgi BJP Se Rajnitik Samman Ki Maang

     समाज के नेताओं का मानना है कि दतिया उपचुनाव के दौरान समाज की अनदेखी का असर चुनावी वातावरण पर भी दिखाई दिया। उनका कहना है कि यदि समाज की भावनाओं को समय रहते समझा जाता और उसे उचित प्रतिनिधित्व दिया जाता, तो स्थिति अलग हो सकती थी। इस पूरे घटनाक्रम ने समाज के भीतर यह भावना मजबूत की है कि चुनाव के समय तो उनके समर्थन को महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन सत्ता और निर्णय प्रक्रिया में उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं दिए जाते।

     हाल ही में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न निगमों, मंडलों और अन्य संस्थाओं में की गई नियुक्तियों को लेकर भी समाज ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि इन नियुक्तियों में तेली, साहू और राठौर समाज के किसी भी प्रमुख प्रतिनिधि को स्थान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि इससे समाज के बीच यह संदेश जा रहा है कि राजनीतिक योगदान और वर्षों की निष्ठा के बावजूद उन्हें उचित सम्मान नहीं मिल रहा है।

     समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि मध्य प्रदेश में तेली-साहू-राठौर समाज बड़ी संख्या में निवास करता है और लंबे समय से भाजपा के साथ मजबूती से जुड़ा रहा है। चुनावी अभियानों से लेकर संगठनात्मक गतिविधियों तक समाज के लोगों ने हमेशा सक्रिय भूमिका निभाई है। इसके बावजूद संगठन, निगम-मंडलों, आयोगों, बोर्डों तथा अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं में समाज की भागीदारी अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है, जो चिंता का विषय है।

     समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे किसी राजनीतिक दल का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि केवल अपने समाज को उसका उचित सम्मान, भागीदारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि लोकतंत्र में प्रत्येक समाज को उसकी जनसंख्या, योगदान और राजनीतिक भूमिका के अनुरूप अवसर मिलना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है, तो समाज के भीतर असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।

     उन्होंने भाजपा प्रदेश नेतृत्व से आग्रह किया है कि अभी भी समय है कि समाज की भावनाओं को समझते हुए निगम-मंडलों, आयोगों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं में तेली-साहू-राठौर समाज को सम्मानजनक स्थान दिया जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल समाज का विश्वास मजबूत होगा, बल्कि पार्टी और समाज के बीच वर्षों से चले आ रहे संबंध भी और अधिक सशक्त बनेंगे।

     समाज के नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो समाज अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के लिए बाध्य हो सकता है। उनका कहना है कि लगातार हो रही उपेक्षा से कार्यकर्ताओं और आम समाजजन में निराशा बढ़ रही है, जिसका प्रभाव भविष्य के चुनावों में भी दिखाई दे सकता है।

समाज की प्रमुख मांगें

  • निगमों, मंडलों और आयोगों में सम्मानजनक प्रतिनिधित्व दिया जाए।

  • संगठनात्मक स्तर पर समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

  • दतिया उपचुनाव में समाज की अनदेखी की समीक्षा की जाए।

  • समाज के राजनीतिक और सामाजिक योगदान को उचित सम्मान मिले।

  • शासन और निर्णय प्रक्रिया में समाज को प्रभावी स्थान प्रदान किया जाए।

समाज का स्पष्ट संदेश

      "यदि समय रहते तेली-साहू-राठौर समाज को सम्मानजनक भागीदारी और प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया, तो समाज अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए विवश होगा।"

     समाज के प्रतिनिधियों ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मांग की है कि समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए उसे राजनीतिक, संगठनात्मक और प्रशासनिक स्तर पर उचित भागीदारी प्रदान की जाए, ताकि समाज में बढ़ रही नाराजगी को दूर किया जा सके।

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