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महात्मा गांधी सिर्फ मोदी समाज के नहीं थे, तो भारतीय समाज की अमूल्य धरोहर बने !

02 October 2026 O.B.C. 26 views

डॉ. महेंद्र धावड़े, संस्थापक अध्यक्ष, बलीराजा पार्टी तथा प्राचीन तेली समाज के इतिहासकार 

     महात्मा गांधी (मोहनदास करमचंद गांधी) को भारत का राष्ट्रपिता माना जाता है और वे सत्य व अहिंसा के दर्शन के वैश्विक प्रतीक हैं।  उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर (गुजरात) में हुआ था और उनके राजकोट शाला के दाखिला में (मोदी) जाति का उल्लेख है । २० जनवरी १९४६ में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मैं सिर्फ़ तेल घानी वाला १५-२० रुपया कमाने वाला तेली नहीं बनूँगा बल्कि उसमे इतनी सिद्धि डालूँगा की मैं सबसे ऊपर उठने वाला व्यक्तिव बनूँगा । गांधीजी के पारंपरिक घर से तेल निकालने वाला कोल्हू भी था वो भारत सरकार द्वारा प्रकाशित जीवनी में भी लिखा गया था । उनकी हत्या 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा की गई थी।

     गांधी जी की सामाजिक धरोहर

     गांधी जी केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक भी थे।

Gandhi Sirf Teli Modi Samaj Ke Nahi Bharatiya Samaj Ki Amulya Dharohar

     अहिंसा और सत्याग्रह का सिद्धांत, जिसने न केवल भारत को आज़ादी दिलाई बल्कि विश्व भर में नागरिक अधिकार आंदोलनों को प्रेरित किया।

     छुआछूत और जातिवाद का विरोध—उन्होंने हरिजनों (दलितों) के उत्थान के लिए कार्य किया और उन्हें “हरिजन” (ईश्वर की संतान) कहकर सम्मान दिया।

     ग्राम स्वराज का सपना—उनका मानना था कि भारत की आत्मा गाँवों में बसती है और सच्ची स्वतंत्रता तभी होगी जब गाँव आत्मनिर्भर होंगे।

     महिला सशक्तिकरण—वे महिलाओं की शिक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भागीदारी के पक्षधर थे।

     स्वच्छता, शिक्षा और खादी को बढ़ावा—उन्होंने स्वदेशी वस्त्र (खादी) पहनकर आर्थिक स्वतंत्रता और ग्रामीण उद्योगों को प्रोत्साहित किया।

गांधी दर्शन: मानव अधिकारों की आधारशिला

     गांधी जी ने अहिंसा को जीवन का मूल मूल्य बनाया और सत्य को एक ऐसे अस्त्र के रूप में प्रयोग किया जिसका प्रभाव कभी व्यर्थ नहीं जाता।  दक्षिण अफ्रीका में उन्होंने भारतीयों के समान अधिकारों के लिए संघर्ष किया और वहाँ से सत्याग्रह की रणनीति विकसित की, जिसे बाद में भारत के स्वतंत्रता संग्राम में लागू किया।

गांधी जी के प्रमुख आंदोलन

     १)चंपारण आंदोलन (1917) – किसानों के अधिकारों के लिए पहला सत्याग्रह।

     २)असहयोग आंदोलन (1920) – अंग्रेज़ी वस्तुओं, स्कूलों और नौकरियों का बहिष्कार।

     ३)सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) – दांडी यात्रा और नमक कानून तोड़ना।

     ४)भारत छोड़ो आंदोलन (1942) – अंग्रेज़ों से भारत तुरंत खाली करने की मांग।

गांधी जी के अनमोल विचार

१)”मनुष्य के रूप में हमारी सबसे बड़ी क्षमता दुनिया को बदलना नहीं, बल्कि खुद को बदलना है।”

२)”पाप से घृणा करो, पापी से नहीं।”

३)”अहिंसा परमो धर्म।”

४)”मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है। सत्य ही मेरा ईश्वर है। अहिंसा ही उसे पाने का साधन है।”

     महात्मा गांधी भारतीय समाज की अमूल्य धरोहर हैं—उनके विचार, आंदोलन और जीवनशैली आज भी प्रासंगिक हैं।  उनका जन्मदिन 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है और यह दिन अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस भी है।

नशा मुक्ति में गांधीजी का योगदान

     महात्मा गांधी नशे को व्यक्ति, परिवार और समाज के लिए अत्यंत हानिकारक मानते थे। वे विशेष रूप से शराब और अन्य मादक पदार्थों के विरुद्ध जन-जागरण चलाते थे तथा भारत को नशामुक्त बनाने के लिए नैतिक सुधार और आत्म-संयम पर बल देते थे।

     १)गांधीजी शराब को गरीबी, अपराध, बीमारी और पारिवारिक कलह का बड़ा कारण मानते थे।

     २)उन्होंने लोगों से शराब और नशीले पदार्थों का त्याग करने की अपील की।

     ३)स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों ने कई स्थानों पर शराब की दुकानों के सामने शांतिपूर्ण धरना और पिकेटिंग की।

     ४)वे नशाबंदी को केवल सरकारी कानून का विषय नहीं, बल्कि जनता के नैतिक और सामाजिक सुधार का विषय मानते थे।

     ५)गांधीजी का विश्वास था कि नशा छोड़ने के लिए व्यक्ति में आत्मबल, अनुशासन और दृढ़ संकल्प होना चाहिए।

     ६)उन्होंने महिलाओं को भी नशामुक्ति आंदोलन में सक्रिय भाग लेने के लिए प्रेरित किया, क्योंकि नशे का सबसे अधिक प्रभाव परिवार और बच्चों पर पड़ता था।

     ७)उनका मानना था कि सरकार को शराब से राजस्व कमाने के बजाय जनता के स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए।

     ८)वे नशे के आदी लोगों से घृणा नहीं, बल्कि सहानुभूति, समझ और सुधार का अवसर देने के पक्षधर थे।

     गांधीजी के अनुसार सच्ची स्वतंत्रता तभी संभव है, जब व्यक्ति बुरी आदतों का गुलाम न हो। इसलिए नशा मुक्ति के लिए उन्होंने आत्मसंयम, जन-जागरण, शांतिपूर्ण आंदोलन और सामाजिक सहयोग का मार्ग अपनाया। आज भी उनका संदेश—“नशा छोड़ो, स्वस्थ जीवन अपनाओ”—समाज के लिए अत्यंत उपयोगी है। गांधीजी की पुण्यतिथि को कई स्थानों पर नशामुक्ति संकल्प दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

     आज भारत को फिर से गांधीजी के विचारो की आवश्यकता है क्योंकि महात्मा गांधी ने अपने जीवन के अंतिम दिनों में भारत विश्वगुरु बनने का संकल्प लिया था ।लेकिन आज के परिपेक्ष में भारत में १९७४ जैसी स्थिति पैदा हुई है जिसके चलते आज देश कुछ व्यापारी वर्ग के लिए एक खिलौना बन गया है ।

     हम सभी मिलकर गांधीजी के सपनों को साकार करने का संकल्प लेते हैं यही उनको सच्ची श्रद्धांजलि है ।

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