वधू - वर फॉर्म

धर्मात्मा तेली तुलाधर

10 May 2017 Teli samaj 190 views

    महाभारत के शांतिपर्व के वर्णन अनुसार, ऋषि जाजलि ने कठोर तप कर सिद्धि प्राप्त की, जिस पर उसे गर्व था । ऋषि के अहंकार से नाराज होकर उसके गुरू ने कह दिया कि वाराणसी का तेली समाज वैश्य तुलाधर संसार भर में धर्मात्मा, तपस्वी एवं तत्वदर्शी है । प्रतिस्पर्धी स्वभाव वस ऋषि जाजलि ने धर्मात्मा तुलाधर से भेंट कर पुछा कि अनेक प्रकार के तेलों एवंद्रव्यों का व्यापर करते हुए भी तुम्हें दार्शनिक अंतर्दृष्टि कैसे प्राप्त हुई । धर्मात्मा तुलाधर ने उत्तर दिया मै अपना काम ईमानदारी से करता हॅू । मै सोमरस छोडकर इत्र, दवाएं, तेल, घी, शहद आदि बेचता हूं । ऋषि जाजलि को परंपरानुसार द्रव पदार्थीे के व्यवसाय से होने वाली हिंसा (शहद में मधुमक्खी, जडी - बुटी के लिए वृक्षों को काटना इत्यादी ) का पूर्वाग्रह था । इसके उत्तर में धर्मात्मा तुलाधर ने कहा कि जैसे कृषि कार्य के लिए हल चलाने से अनेक कींडे - मकोडे मर जाते हैं फिर भी कृषि कर्म दोष रहित है उसी प्रकार तेल का व्यवसाय भी दोष रहित है ।   Dharmatma Teli Tuladhar

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