वधु - वर फॉर्म

राजिम माँ की औलाद हो

16 May 2017 Teli samaj 111 views

गर्व हमें है, हम है तेली 
निज गौरव, स्वाभिमान हैं, 
सरल सौम्य, योद्धा भी जन्मे
पावन एक पहचान हैं ।

कांतिहीन सा चेहरा छोडो
हेमूशाह फौलाद हो,
मॉ कर्मा के, आंख का तारा
राजिम मॉ की औलाद हो । 

Rajim Mata


झांको तो इतिहास तुम्हारा
कैसा स्वर्णिम राज था,
नीति धर्म के तुम संरक्षक
साहूकारी का काज था ।

तुम हो पुरोधी, वैश्य कर्म का
तेल, इत्र निर्माता हो,
श्रमशीलता का हो उदाहरण
स्वयं भाग्यविधाता हो ।

जहा बात हो राष्ट्रधर्म का
देश-भक्त, स्वाभिमानी हो 
राणा के हो, शौर्य रक्षक 
अमर (भामा) बलिदानी हो ।

राजा भोज को प्राण दान दे 
कृष्ण देव बन अमर हुए
आल्हा उदल के वीर सेनानी 
धनुवा तेली कहर किये ।

ज्ञान प्रकाश का पूंज्य बनकर
नालंदा की नींव गढे
अखिल विश्व में बौद्ध धर्म का
लेकर झंडा आगे बढे ।

धर्मात्मा थे, वैश्य तुलाधर
गर्व जाजलि का तोडा,
संत तुका के प्रिय संताजी 
बिखरे अभंगो को जोडा ।

उनकी महिमा मैं क्या गांऊ
जो गुरू गोरखनाथ हुए
महायोगी, ब्रम्हचारी बनकर
नाथों के जो नाथ हुए ।

आआ तुमको और बता दूं
क्या थे तेली आज तुम्हे 
सोये हैं, स्वाभिमान भूलकर
नही है, गौरवगान जिन्हें ।

मॉ कर्मा की अमर कहानी
किसे नही है, ज्ञात भला
प्रेम स्नेह, वात्सल्य भाव के 
बीच क्या आया जात भला ।

शुद्र समझ जिनकों थे भगाया
मद में चुर अज्ञानी थे
खिचडी खाने दौडे प्रभु जी
वो जगन्नाथ जी स्वामी थे

धन्य - धन माँ कर्मा जिनके 
प्रेम की आखिर जीत हुई,
श्रद्धा और समर्पण जीता 
निसे प्रभु प्रीत हुई ।

कमल क्षेत्र, पद्मावती पुरी
स्वयं नारायण वास जहां
राजिम तेली माता जन्मीं
उनसा भक्तिन और कहॉ ।

जिनके क्षेत्र, पद्मावती पुरी
स्वयं नारायण वास जहां
राजिम तेली माता जन्मीं
उनसा भक्ति और कहॉ ।

जिनके भक्ति के प्रभाव से
राजिम नगरी धाम बना
नारायण के नाम के पहले 
मॉ राजिम का नाम लगा ।

अब तो चिंतन करना होगा
स्वाभिमान को जगाना है
खोये गौरव गरिमा फिर से 
घर-घर फिर, लौटाना है ।

हम है भारत मॉ के बेटे 
कर्मा के संतान है
मॉ राजिम के, कोख में जन्में
भामा के पहचान हैं ।

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