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छोटानागपुरिया तेली समाज

24 July 2016 Other 39 views

teli samaj ghana     झारखण्ड की भौगोलिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतीक दृष्टि कोन से अति प्राचिन वन-पठार का भूखण्ड है । जिसमें रामायण - महाभारत कालीन, कोल्ह, किरात, निशाद आदि जातियो का निवास रहा है । कोल्ह तेली सदा से इस भूखण्ड में रहते आ रहे है । यह क्षेत्र (मुख्य रूपसे झारखंंण्ड के राँची, लोहरदगा, गुमला, खूँटी और सिमडेगा जिला ) कोल्ह तेलियों की जन्मभुमि एवं कर्म भुमी रही है । ई. सन. से पुर्व अज्ञात काल से इस जाति (कबिला) के प्रधान का आवास की प्रमाण अभी भी पुरातत्त्वों तथा इतिहास में प्रापत है लोहरदगा जिला के कोराम्बे, गुमला जिला के हापामुनी, मे तेलियागढ के अवशेष उपलब्ध है । अति प्राचीन काल से निावास करने ाली यह जाती की वर्तमान स्थिती बहुत दयनीय है । इनकी सामाजिक, राजनीलक, आर्थिक एवं शैक्षणिक स्थिती इस प्रकार है :-

सामाजिक स्थिति :- तेली जाति की संख्या इस क्षेत्र में लगभग 25 % है सभी जतियों के साथ समरसत्ता पूर्वक आपस में सहिया - गोतिया का नाता निभाते हुए निवास करी है । सभी समुदायों के साथ हमारी नता एवं गाँव गवारी का रिश्ता है ।

आर्थिक स्थिती :- तेली समाज मूलत: कृषि पद आधारित है । अनावृष्टि एवं सरकारी सुविधाओ से अपेक्षित आर्थिक स्थिती दयनीय है । भारती प्रशासनिक एवं राज्य प्रशासनिक सेवा में उपस्थिती शून्य है । पूरी तरह पना हाड मांस रगडकर जीने वाली यह जाति अपनी दयनीय आर्थिक स्थिती के खून का घूंट पी रही है । वर्तमान में 5.10% लोंगो ं का सन्मान साधारण व्यवासाय की औ बडा लेकिन पूंजी का अभाव एवं सरकरी प्रोत्साहन में कमी प्रगति में बाधक बना हुआ है ।

शैक्षणिक स्थिती :- प्रथमिक शिक्षा में लगातार सुधार हो रहा है उच्च शिक्षा में आर्थिक स्थिती रोडे पैदा कर ही है राज्य के बाहर उच्च शिक्षा प्राप्त कीना अब भी सपना है और राज्य के अन्दर अच्छी शिक्षा ी व्यवस्था नही है उसपर से कुछ एक अच्छे शैक्षणिक संस्थाओं में आरक्षण की मार हतोत्साहित करने के लिऐ काफी है । गुमला में समाज का एकमात्र छात्रावास समाज की भुमी पर सांसद एवं विधाक कोश से 12 कमरे का बना हुवा है जिसमें मात्र 50 छात्र रहकर विद्या ग्रहण करते है । अन्य कहीं छात्रावास एवं छात्रवृति की सुविधा तो झारखण्ड में हमारे लिऐ एक सा बना हुवा है ।

राजनीतिक स्थिती :- तेली जाति सहित तमाम अन्य सदान जातिया यहाँ दूसरे दर्जे की नागरिक बन के रह गये है । झारखण्ड राज्य की इन पाँचो जिले में काफी जनसंख्या के रहते हुए भी हम राजनीतिक अधिकार से पुरी तरह वंचितहै । लोकसभा, विधानसभा, पचायत के मुखिया सहित तमाम एकलं सीट के लिये  भारत के नागरिक होते हुए भी हमें अपने मूल अधिकार से वंचित किया गया है ।

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