Sant Santaji Maharaj Jagnade
हरदिया साहू समाज में मंत्री हो या संतरी नहीं सजाएंगे ब्याह मंडप
छत्तीसगढ़ में आदर्श विवाह की शुरुआत करने वाले हरदिया साहू समाज ने अनूठा संकल्प लिया है । तय किया है कि समाज के किसी भी घर में शादी ब्याह में का मंडप नहीं लगाया जाएगा । समाज में शादियां होंगी तो केवल सामूहिक विवाह समारोहों में ही । मंत्री हो या संत्री सभी को समाज के इस संकल्प का पालन करना होगा ।
प्रान्तीय वैश्य तैलिक परिचय सम्मेलन व सामूहिक विवाह में शामिल हुए मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह रविवार को यहां रायपुर के टाटीबंध स्थित मोहन मैरिज पैलेस में आयोजित वैश्य साहू समाज द्वारा आयोजित प्रान्तीय वैश्य तैलिक युवक-युवती परिचय सम्मेलन और सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल हुए. उन्होंने इस मौके पर कहा कि सामूहिक विवाह जैसे आयोजन की पहल सबसे पहले साहू समाज ने ही की है. उनकी प्रेरणा से राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की शुरूआत की गई है.
तहसील साहू संघ ने लिया निर्णय... मांसाहार सेवन करते पाए जाने पर दंडित करेगा साहू समाज
खैरागढ़. तहसील साहू संघ की कार्यकारणी बैठक स्थानीय साहू धर्मशाला में तहसील अध्यक्ष घम्मन साहू की अध्यक्षता में हुई । बैठक में प्रदेश एवं जिला से प्राप्त सामाजिक संशोधित नियमावली 2016-17 में उल्लेखित सामाजिक नियमों का पालन करने का प्रस्ताव साहू संघ द्वारा संकल्प प्रस्ताव पारित करते हुए समाज में शराब बंदी एवं मांसाहार सेवन करते पाये जाने पर सामाजिक दायित्वों से हटाकर सामाजिक दंड किया जाएगा ।
प्रतिभावान महिलाओं का सम्मान व होली मिलन का आयोजन किया । नारी शक्ति ने हर क्षेत्र में योगदान दिया, भारत का मान बढ़ाया - साहू
आदिवासी बहुल गांव मंजराही (जुनवानी खुर्द) में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर वरिष्ठ व उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं का सम्मान समारोह व होली मिलन का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि युगल किशोर साहू ने कहा कि नारी शक्ति ने हर क्षेत्र में योगदान दिया है। वैदिक युग में गार्गी, मैत्री जैसी विदुषियों ने भारत का मान बढ़ाया । स्वतंत्रता आंदोलन में रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती ने वीरता दिखाई ।
समय के साथ कदमताल... साहू समाज ने समय के साथ बदली सोच, मय्यत में कफन की जगह लेकर जाते हैं मदद की राशि । समाज की खातिर मृत्यु भोज में मीठा खिलाने से दुर्ग सांसद ने किया तौबा
भिलाई - छत्तीसगढ़ साहू समाज ने बरसों से चली आ रही मृत्युभोज में मीठा खिलाने की परंपरा को अब ना कह दिया है । ऊंच-नीच, छोटे-बडे, अमीरगरीब का भेद दूर करते हुए समाज में एक साथ इस नियम को अपनाने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है । समाज की ये पहले उस वक्त और अधिक प्रभावी हो गई जब दुर्ग के सासद ताम्रध्वज साहू ने अपने पिता के स्वर्गवास के दशगात्र कार्यक्रम में मीठा खिलाने से स्वयं हाकर परहेज किया ।