Sant Santaji Maharaj Jagnade
1) झरिया शाखा , 2) हरदिहा शाखा, 3) राठौर शाखा, 4) रंगहा, 5) तेली वैश्य शाखा, 6) तरहाने तेली शाखा इत्यादी प्रमुख शाखा है ।
1) झरिया शाखा :- इस शाखा को झेरिया या झिरिया भी कहते है । सर्वाधिक जनसंख्या इसी शाखा के लोग मूलत: किसान है ।
2) हरदिहा शाखा :- इस शाखा के लोग रायपुर नगर के आस -पास, धमतरी एवं दुर्ग जिला के धमधा क्षेत्र में निवासरत है । अंग्रेजो ने अपने प्रविेदनों में इन्हें हलिया उल्लेखित करते हुये श्रेष्ठ कृषक भी कहा है । पूर्व विधायक श्री नंद कुमार साहू इसी शाखा से हैं ।
उदयपुर । अखिल भारतीय मेवाड क्षत्रिय घांची राजस्थान तेली समाज का प्रतिभावान छात्र सम्मान समारोह रविवार को देलवाडा स्थित समाज भवन हुआ । कार्यक्रम की अध्यक्ष एडीम उदयपुर सिटी ओपी बुनकर ने की । मुख्य अतिथि कर्मचारी सेवा संघ प्रदेशाध्यक्ष मीठालाल बोराणा थे । कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों ने दिप प्रजवल्लन कर की । समाज की बेटियों ने इस मौके पर सांस्कृतिक रंगारंग प्रस्तुतियां भी दी ।
7 मई 2017 काे जालौन में आयाेजित सामूहिक विवाह के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मा. यशाेदाबेन तेली साहु समाज को मार्गदर्श्न किया. उत्तर प्रदेश जालौन जिल्हे के साहु तेली समाज केलागे बडी संख़्या मै सामिल हुवे और आयोजन को सफल बनाया. मुख्य अतिथि मा. यशोदाबेन ने समाज को ओजस्वी भाषण दिया. मा. यशाेदाबेन अभिवादन प्रदेश अध्यक्ष मा. कैलाश साहू जी, अम्रीतलाल साहू जी , प्रदेश प्रभारी मा. डी.सी. गाँधी जी, युवा प्रदेश महामंत्री मा. मनाेज गुप्ता जी और समस्त तेली साहु समाज ने बडी भव्यता से किया.
मा.प्रमोदजी देंडवे साहेब, महाराष्ट्र प्रदेश सचिव योगेशजी गोतमारे व सर्व सन्माननीय अकोला येथील पदाधिकारी यांच्या शुभहस्ते करण्यात आले यावेळी माजलगांव तालुका शाखेचे नवनिर्वाचित पदाधिकारी तालुकाध्यक्ष कृष्णा कानडे, तालुका उपाध्यक्ष परमेश्वर शिंदे, तालुका सचिव गोविंद देशमाने, तालुका कोषाध्यक्ष अमर गिरी, तालुका संपर्क प्रमुख पत्रकार भगीरथ तोडकरी, सदस्य शिवा डुकरे, तुकाराम कळसाईतकर, प्रशांत सातपुते, मोहन अंकुशकर, गोविंद क्षिरसागर तसेच सर्व सन्माननीय सदस्य आदी उपिस्थित होते.
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नाथ संप्रदाय के प्रवर्तक गुरु गोरखनाथ महान योगी दार्शनिक धर्मनेता युग प्रवर्तक आचार्य थे । इनका प्रादुर्भाव 9 वी सदी में पेशावर या गोरखपुर में हुआ था । यह जिज्ञासुएवं भ्रमणशील स्वभाव वाले थे और इन्हीं वेदों उपनिषदों स्मृतियो एव संस्कृत साहित्य का ज्ञान होते हुए की उन्होंने अपने मत का प्रचार जनभाषा में किया था । यह ब्राह्मणवादी व्यवस्था के विरोधी थे । इन्होंने हठयोग, गोरख संहिता, गोरक्ष गीता, प्राण संकली, सबदी आदि 43 ग्रंथों हिंदी में लिखे हैं तथा अमनस्क, अमरोध शसनम अवधुत गिता गोरक्ष कौमूदी, गोरक्ष शतक सहित 31 ग्रंथ संस्कृत मैं लिखे है ।