Sant Santaji Maharaj Jagnade
ईश्वर बाळबोधे अध्यक्ष राष्ट्रवादी कांग्रेस महाराष्ट्र ओबीसी सेल
देश के सभी तेली भाई और बहनों को जय भारत । आजादी के बाद देशभर में तेली इकट्ठा होने लगे हैं । देर हो गई थी क्योंकि इसके पहले ब्राह्मण बनिया क्षत्रिय जातियां अपना संगठन बल खड़ा कर रहे थे, उन्होंने आजादी अपने पास ही सीमित रख दी थी । तेली जाति का समूह का जब जब विकास का मौका आएगा तो उन जातियों को विकास का मौका आया तो उनको जातियों के नाम पर बांट के उनके विकास का रास्ता बंद किया गया ।
डॉ. महेंद्र धावडे
प्राचीन भारत से लेकर आधुनिक भारत तक विभिन्न सामाजिक संस्थाओं का उदय संगठन उत्थान और सभ्यता तथा संस्कृति के विकास का भी जिक्र महत्वपूर्ण है. समाज के विभिन्न कॉल करने में हुए संक्रमण यह वह वर्ण व्यवस्था जाति के रीति रिवाज आदि परिवर्तनों की खोज करना तथा नए आयामों को अंजाम देना यह तेल समाज का कुदरती करिश्मा था.
संत संताजी अध्यासन - तेली समाज
कडा - येथे तेली गल्ली मध्ये भवानी मातेची मंदिर होते. या मंदिराची समाज बांधवांनी उभारणी गाव पातळीवर निधी गोळा करून केली आहे. याच मंदिरात श्री संत संताजी यांची मुर्ती आसावी अशी इच्छा श्री. चंद्रकांत सासाणे यांनी समाज बांधवा समोर व्यक्त केली. सर्वानी एका मुखाने त्यास मान्यता दिली. श्री. सासाणे यांनी पंढरपूर येथे जावून श्री. संत संताजी यांची अभंग लेखन करितानाची सुबक मुर्ती स्वखर्चाने बनवुन आणली.
शिरिषशेठ पन्हाळे
देशभर में तेली समाज तेरा प्रतिशत है वह सुन कर बड़ी खुशी हो गई है । जब मैं 5/10 बरस का था तब मेरी मामा के यहां डिंग्रस जाया करता था । डिंग्रस मे कै. माधवराव पाटिल (महिंद्रे) तेली समाज के काम कर रहे थे । उसी वक्त पूरे देश भर तैलिक साहू महासभा समाज के लिए काम भी कर रहे थे । देश के नेतागण डिंगज में आते थे समाज के बारे में चिंता होती थी ।
पंढरपुरच्या विठ्ठुराायाला वारकरी सांप्रदाय आणि त्यांचा महिमा वर्णन करणारे अद्वितीय असे हे संत वांग्डमय हा मराठी संस्कृतीचा अनमोल असा गाभाच आहे असे म्हणायला हरकत नाही. महाराष्ट्रात अनेक राजकीय स्थालांतरे झाली एवढेच नव्हे तर महाराष्ट्रात परकीय सरकारे पण आली तरीही विठु माऊली च्या पंढरपूर वारीची परंपरा आज हजारो वर्ष वारकरी सांप्रदयात चालतच आलेली आहे.