Sant Santaji Maharaj Jagnade
विद्वान अभी तक यह मानते हैं कि सिंधु सभ्यता काल जिसे पूर्व वैदिक काल भी कहा जाता है, सप्त सैंधव प्रदेश (पुराना पंजाब, जम्मू कश्मीर एवं अफगानिस्तान का क्षेत्र) में, जो मुनष्य थे वे त्वचा के रंग के आधार पर दो वर्ग में विभाजित थे । श्वेत रंग वाले जो घाटी के विजेता थे 'आर्य'' और काले रंग वाले जो पराजित हुये थे 'दास' कहलाये। विद्वान आर्य का अर्थ श्रेष्ठ मानते हैं क्योंकि वे युद्ध के विजेता थे। ये मूलत: पशु पालक ही थे। कालांतर में इन दोनों वर्गों में रक्त सम्मिश्रण भी हुआ और वृहत्तर समाज वर्गों में बंटते गया, जो संघर्ष की जीविविषा है।
मांडलगढ़ त्रिवेणी सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि विधायक गोपाल जी खंडेलवाल , विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय तेली महासभा राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष सूरज राठौर समाज के बड़े उद्योगपति , भामाशाह, शिवजी चंद्रवाल एवं बिहार से सूर्य देव प्रकाश साहू एवं अध्यक्षता कर रहे अखिल भारतीय तेली महासभा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल राठौर ने अपने उद्बोधन में समाज हित की एवं संगठित रहने की बात कही,
भागलपुर. नाथनगरस्थितप्रो अरविद कुमार साहक आवास पर अखिल भारतीय | तेली महासभा की बैठक हुई.प्रो अरविंद कुमार साह ने अध्यक्षता की. संचालन पूर्वी | बिहार अध्यक्ष नीरज साह ने किया. इस मौके पर अजय शंकर साह को भागलपुर नगर अध्यक्ष, अशोक साह को महासचिव, पंकज कुमार को नगर सदस्य मनोनीत किया गया. डॉ प्रदीप साह को जिला अध्यक्ष, नंदगोपाल साह को जिला महासचिव, रामसुंदर साह को उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया.
16 मई को भोपाल में होगा प्रदेश स्तरीय सम्मेलन
जबलपुर तेली समाज की आबादी के अनुसार उसे राजनैतिक महत्व नहीं मिल रहा है और न ही सरकार द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों की पदस्थापना महत्वपूर्ण विभागों में की जा रही। उक्त बात शुक्रवार को आयोजित प्रेसवार्ता में राष्ट्रीय तेली साहू महासंगठन मध्यप्रदेश के नवनियुक्त मुख्य संरक्षक पूर्व विधायक किशोर समरीते ने कही।
इस समय ओबीसी समाज में अपनी जनगणना को लेकर उबाल है। लोग येन-केनप्रकारेण जनगणना 2021 के जनगणना फार्मेट में ओबीसी का कॉलम देखना चाहते हैं। वह तय कर चुका है कि यदि जी फॉर्मेट में ओबीसी का कॉलम नहीं होगा तो वह जनगणना का बहिष्कार करेगा, फिर भी हमारे जनप्रतिनिधि ओबीसी समाज की इस जागृति और जरुरत को हल्के से ले रहे हैं।