Sant Santaji Maharaj Jagnade
तैलप तृतीय का पुत्र सोमेश्वर चतुर्थ (1181-1189 ई) चालुक्य वंश का अन्तिम शासक हुआ । वह पराक्रम से कल्याणी को पुन: जीतने में कामयाब रहा । लेखों में उसे चालुक्याभरण श्रीमतत्रैलोक्यमल्ल भुजबलबीर कहा गया है । सभ्भवत: भुजबलबीर की उपाधि उसने कलचुरियो के विरुद्ध सफलता के उपलक्ष्य में ही धारण की थी । एक लेख में उसे कलचुरिकाल का उन्मूलन करन वाला (कलचूर्यकाल निर्मूलता)कहा गया है । इस प्रकार सामेश्वर ने चालुक्य वंश की प्रतिष्ठा को फिर स्थापित किया । कुछ समय तक वह अपने साम्राज्य को सुरक्षित बचाये रखा । परन्तु उसके राज्य में चारो ओर विद्रोह हो जाने के कारण स्थिति को संभाल नहीं सका । 1190 ई. के लगभग देवगिरी के यादवों ने परास्त कर चालुक्य राजधानी कल्याणी पर अधिकार कर लिया ।
कल्याणी केचालुक्यों का स्वतंत्र राजनैतिक इतिहास तैल अथवा तैलजप द्वितीय (973-997 ई.) के समय सेप्रारभ्भ हाता है । उसके पर्व हमें कीर्तिवर्मा तृतीय, तैल प्रथम के नाम लिते है । इनमे तैलप प्रथ तथा विक्रमादित्य चतुर्थी के विय में भाी हमें यह जानकारी प्राप्त होतीहै, ये भी राष्ट्र कुट नरेश लक्ष्मणसेन की कन्य बोन्थादेव्री के साथ सम्पन्न हुआ और इसी से तैलव द्वितीय का जन्म हुआ । नीलकण्ठ शास्त्री अनुसार ये सभी शासक ीजापुर तथा उसकें समीपवर्ती क्षेत्र में शासन करते थें जो इस वंश की मुल राजधानी के पास में था ।
कानपुर :- दिनाँक 01/05/2016 को श्री महिमा आई टी आई मे उत्तर प्रदेश तैलिक साहू महासभा की प्रान्तीय कार्यकारिणी की बैठक पूर्व विधायक झाँसी एवं प्रदेश अध्यक्ष कैलाश साहू की अध्यक्षता मे आयोजित की गई ।
????सिहंस्थ महाकुंभ उज्जैन म.प्र???? 22 अप्रैल से 21 मई 2016, अखिल भारतीय साहू वैश्य महासभा म.प्र
????आमंत्रण.........तेली साहू स्वजातिय बंधओ आपको बताते हुए अति प्रसन्नता हो रही है की बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन क्षिप्रा के तट पर ''सिहंस्थ महाकुंभ'' 2016 मे प्रथम बार ''अखिल भारतीय साहू वैश्य महासभा" एव सभी तेली साहू समाज को एक मंच पर एकत्रित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है हम सभी तेली स्वजाति बंधु मिलकर इस महाकुंभ मे शासन दृारा आवंटित 1लाख स्के.फीट भूमि (जमीन)
3 अप्रेल 2016 दिन-रविवार, जय माँ भक्त शिरोमणि माँ कर्मा देवी की १००० वी जयंती पर सभी समाज बंधुओं को हृदिक बाधाई.