Sant Santaji Maharaj Jagnade
नाशिक - तेली समाजासाठी कार्य करणार्या श्रीग्रुप फाउंडेशनच्या वतीने अयोजित वंचितांच्या वूध-वर मेळाव्यासाठी यंदा तब्बल 400 इच्छुकांची नावनोंदणी करण्यात आली होती. त्यात आर्थिक दुर्बल, अंध, मुक - बधिर, घटस्फोटित, विधूर, विधवा व वयस्कर वधू -वरांचा उत्स्फूर्त सहभाग होता. यानिमित्ताने त्यांच्यासाठी आयुष्यभराचे ऋणानुबंध जुळण्याचा योग आला होता.
भावपुर्ण श्रद्धांजली गं. भा. जमुना दगडू राऊत
गं.भा. जमुना दगडू राऊत यांचा मंगळवार 2/4/2017 रोजी स्वर्गवास झाला.
श्री. रमेश राऊत माजी पंच तेली समाज पुणे व बिबवेवाडी येथील सोन्या चांदीचे व्यापारी यांच्या त्या मातोश्री होत.
भावपुर्ण श्रद्धांजली कै. ज्ञानेश्वर बाळकृष्ण दाभोळे
शिरवळ :- जि. सातारा येथिल प्रतिष्ठीत तेली समाज बांधव व व्यापारी व शेवट पर्यंत
तेली समाज कार्य व निष्ठा त्यांनी दाखवली
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संत संताजी जगनाडे महाराज का जन्म सन 1625 में महाराष्ट्र के पुना (चाकण) में हुआ था । उनके नाना का नाम भिवा जगनाडे पिता का नाम विठोबा जगनाडे और माता का नाम मथुबाई था । और उनका परिवार महान विठ्ठल भक्त था । उनके पिताजीने उन्हे घर मै ही पढाई लिखाई की शिक्षा दि । 12 वर्ष की आयु में उनका विवाह हो गया था । वे पैत्रिक तेल का व्यवसाय करने लगे, किन्तु एक दिन उन्होने संत तुकाराम का किर्तन सुना और उनके शिष्य हो गये ।
महाभारत के शांतिपर्व के वर्णन अनुसार, ऋषि जाजलि ने कठोर तप कर सिद्धि प्राप्त की, जिस पर उसे गर्व था । ऋषि के अहंकार से नाराज होकर उसके गुरू ने कह दिया कि वाराणसी का तेली समाज वैश्य तुलाधर संसार भर में धर्मात्मा, तपस्वी एवं तत्वदर्शी है । प्रतिस्पर्धी स्वभाव वस ऋषि जाजलि ने धर्मात्मा तुलाधर से भेंट कर पुछा कि अनेक प्रकार के तेलों एवंद्रव्यों का व्यापर करते हुए भी तुम्हें दार्शनिक अंतर्दृष्टि कैसे प्राप्त हुई । Dharmatma Teli Tuladhar