Sant Santaji Maharaj Jagnade
देवी सिंह राठौर अध्यक्ष राज्य ईकाई, इन्दौर (म.प्र.) राष्ट्रीय तैलिक साहू राठौर चेतना महासंघ
अपना तैलिक समाज देश के हर क्षेत्र में फैला एक विशाल समाज है परन्तु सम्पर्क के अभाव में यह अलग-अलग समूहों में बटा हुआ है। समाज के कुछ पुराने पंथियों ने भी अपनी हठधर्मिता बनाये रखने के कारण इसे अपने तक ही सीमित रखा और उसका उपयोग अपने हित में किया। वर्तमान बदलते युग में जब दुनियां ही आस-पास लगने लगी है तो हमें अपने समाज को प्रगति पथ पर आगे बढ़ाने के लिए एक जुट होना होगा।
तेली समाजातील महान विभुती (भाग 1) सौ. अरूणा इंगवले, अध्यक्ष चिपळूण तालुका तेली समाज महिला आघाडी
जोगा परमानंद
संत नामदेवांचे गुरू म्हणुन प्रसिद्ध असलेले महापुरूष भाई जोगा परमानंद. हे तेली ज्ञातीतील होते. संत नामदेवांच्याआधी त्यांनी उत्तर भारताचा दौरा केला होता. शिखांच्या गुरू ग्रंथसाहिब या धर्मग्रंथात त्यांच्याही काही रचनांचा समावेश आहे. जोगा परमानंद हे अतिशय उच्च दर्जाचे कवी होते.
तालुका मौदा स्नेही सोशल फोरमचे पाचवे वार्षिक स्नेह संमेलन व कोजागिरी कार्यक्रम प्रगती सभागृह वर्धा रोड नागपूर येथे नुकताच पार पडला. यावेळी विशेष अतिथी म्हणून आमदार रामदास आंबटकर, जिल्हा परिषद अध्यक्ष निशा सावरकर, जवाहर विद्यार्थी गृह अध्यक्ष रमेश गिरडे, नगराध्यक्ष स्मृती इखार, स्नेही सोशल फोरमचे अध्यक्ष शंकर लांजेवार होते. तर प्रमुख पाहुणे म्हणून डॉ. ए. जी. भोळे, महामेट्रोचे महाव्यवस्थापक सुधाकर उराडे,
आर. पी. साहू. दिल्ली प्रदेशअध्यक्ष राष्ट्रीय तैलिक साहू राठौर चेतना महासंघ
आज साहू राठौर समाज के सम्मुख सर्वांगीण विकास की कठोरतम चुनौती है। जैसा कि जग जाहिर है कि सभी विकास के तालों की एक कुंजी है और वह है राजनैतिक विकास एवं सामाजिक प्रतिष्ठा। राजनैतिक विकास के बारे में सभी पूर्णतयः जानते हैं, अतः इस पर बात बाद में करेंगे पहले सामाजिक प्रतिष्ठा की बात करते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा से यहाँ व्यक्तिगत रूप से समाज में प्रतिष्ठा का आशय नहीं है।
National President (Youth Wing) Umesh Shahu Shahu Garden Manewada Road, Nagpur - 27 (M.S.)
देश के अनेक प्रान्तों के निवासी एक स्थान पर एकत्रित होकर समाज के सर्वांगीण विकास हेतु चिन्तन और मंथन करें, पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण वाले स्वजातीय एक दूसरे की प्रगति से प्रेरणा लेकर समाज को आगे बढ़ायें ऐसे ही आयोजन को राष्ट्रीय सम्मेलन के नाम से जाना जाता है। आगन्तुकों के समय, श्रम और समाज के प्रति आत्मियता के सदुपयोग की महती आवश्यकता है।