Sant Santaji Maharaj Jagnade
तेली जाती के लोग भारत और पाकिस्तान में पाये जाते हैं! तेली नाम “खाद्य तेल बनाने” अपने पेशे की वजह से दिया जाता है. पुराने समय में, इन लोगों को उनके छोटे तेल मिलों kolhu या घाना बैलों द्वारा संचालित करने के लिए या की तरह सरसों और तिलके बीज का तेल से खाद्य तेल निकालने के रूप में जाना जाता था! इनका पुश्तेनी काम तेल गाणी से तेल निकाल कर बेचना और रुई पिंजाई का काम करते हैं. मुस्लिम तेली को मंसूरी, Roshandaar या तेली मलिक भी कहा जाता है!
अमरावती : जयभारत मंगल कार्यालय येथे मराठा-तेली समाज विकास मंडळाद्वारे आयोजित शिक्षकांचे स्नेहसंमेलन नुकताच पार पडले. मराठा-तेली समाजात अनेक शिक्षक असले, तरी त्यांना एकमेकांचा प्रत्यक्ष परीचय नाही. त्यामुळे शिक्षकांचेपण संघटन निर्माण व्हावे, यासाठी प्रत्येकाने एकत्र येण्याची गरज आहे, असे प्रतिपादन प्रा.डॉ. संजय तिरथकर यांनी केले.
संत संताजी अध्यासन - तेली समाज
अखिल भारतीय तेली महासभा युवक आघाडीच्या झालेल्या राज्यव्यापी बैठकीत येथील शामकांत जगन्नाथ ईशी यांची प्रदेश कार्याध्यक्षपदी एकमताने निवड करण्यात आली. शिर्डी येथे तेली महासभा युवक आघाडीची राज्यव्यापी बैठक संपन्न झाली. बैठकीच्या अध्यक्षस्थानी महासभेचे राष्ट्रीय अध्यक्ष जयदत्त क्षीरसागर होते. शामकांत ईशी यांची एकमताने प्रदेश कार्याध्यक्षपदी निवड झाल्यानंतर नियुक्तपत्र देत सत्कार करण्यात आला.
उमरेड : महाराष्ट्र प्रांतिक तैलिक महासभा उमरेड की महिला आघाड़ी द्वारा सम्मेलन का आयोजन किया गया. इसकी अध्यक्षता जि.प. सभापति सावित्री ढोबले ने की. डॉ. सुषमा लाखे, मंजू कारेमोरे, संध्या पारवे, रंजना रेवतकर, अलका रेवतकर आदि प्रमुखता से उपस्थित थे. प्रस्तावना महिला आघाड़ी की अध्यक्ष गीता आगासे ने रखी. संचालन सचिव नंदिनी वासुरकर ने किया.
16 मई को भोपाल में होगा प्रदेश स्तरीय सम्मेलन
जबलपुर तेली समाज की आबादी के अनुसार उसे राजनैतिक महत्व नहीं मिल रहा है और न ही सरकार द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों की पदस्थापना महत्वपूर्ण विभागों में की जा रही। उक्त बात शुक्रवार को आयोजित प्रेसवार्ता में राष्ट्रीय तेली साहू महासंगठन मध्यप्रदेश के नवनियुक्त मुख्य संरक्षक पूर्व विधायक किशोर समरीते ने कही।